In the above 4-senses are added the following 17-affixes after the following 17 classes of words respectively - ……………………………………………….,
The above affixes वुञ् &c. are applied to the above classes of words. आदि is to be added to every one of the above seventeen words. The first part of the sutra upto ठक् gives the seventeen affixes, and the latter part gives the seventeen word-class. The allotment or assignment of affixes is made by 1.3.10.
The examples of the above are: (1) आ꣡रीहणकम्, द्रौ꣡घणकम् (2) कार्श्वाश्वी꣡यः, आर꣡ष्टीयः, (3) ऋश्यकः꣡, न्यग्रोधकः꣡, (4) कुमुदिक꣡म्, शर्क्करिक꣡म्, (5) वाशि꣡लम्, काशि꣡लम्, (6), तृणसः꣡, नडसः꣡, (7) प्रेक्षिन्꣡, हलकिन्, (8) अश्मरः꣡, (9) सा꣡खेयम्, सा꣡खिदत्तेयम्, (10) सांकाश्य꣡म्, काम्पिल्य꣡म्, (11) बल्यः꣡, कल्य꣡म्, (12) पाक्षायणः꣡, तौषायणः꣡, (13) का꣡र्णायनिः, वा꣡सिष्ठायनिः, (14) सौत꣡ङ्गमिः, मौ꣡निचित्तिः, (15) प्रा꣡गद्य (16) वाराहक꣡म्, पालाशक꣡म्, and (17) lastly कौमुदिक꣡म् ॥
The word शिरीष will be seen, by referring to the above lists, to occur in three classes viz अरीहणादि, (36), कुमुदादि (14), and वराहादि (3), Moreover it is governed by the general affix अण् also in the quadruple sense, according to the opinion of Patanjali. And because it occurs in the वरणादि class 4.2.82, therefore this universal अण् 4.1.83 will be elided after it. As we have already shown before under (I. 2. 5I) when शिरीषवन was formed from शिरीषाः ॥
1 अरीहण, 2 दुघ्रण, 3 द्रुहण, 4 भगल, 5 उलन्द, 6 किरण, 7 सांपरायण, 8 क्रोष्ट्रायण, 9 औष्ट्रायण, 10 त्रैगर्तायन, 11 मैत्रायण, 12 भास्त्रायण, 13 वैमतायन (also वैमत्तायन), 14 गौमतायन (गो), 15 सौमतायन, 16 सौसायन, 17 धौमतायन, 18 सौमायन,19 ऐन्द्रायण,20 कौन्द्रायण, 21 खाडायन, 22 शाण्डिल्यायन, 23 रायस्तोष, 24 विपथ, 25 विपाश, 26 उद्दण्ड, 27 उदञ्चन, 28 खाण्डवीरण (खाण्ड), 29 वीरण, 30 काशकृत्स्न (कश.), 31 जाम्बवत (वन्त), 32 शिंशपा, 33 रैवत (रेवत), 34 बिल्व (बैल्व K.) 35 सुयज्ञ, 36 शिरीष, 37 बधिर, 38 जम्बु 39 खदिर, 40 सुशर्मन् (सुशर्म K.), 41 दलतृ, 42 भलन्दन, 43 खण्डु, 44 कनल (कलन), 45 यज्ञदत्त, 46 सार, 47 वैगर्तायण (sic) and 48 खाण्डायन.
1 कृशाश्व, 2 अरिष्ट, 3 अरिश्म (अरीश्व), 4 वेश्मन्, 5 विशाल, 6 लोमश, 7 रोमश, 8 रोमक, 9 लोमक, 10 शबल, 11 कूट, 12 वर्चल, 13 सुर्वचल, 14 सुकर, 15 सूकर, 16 प्रतर (प्रातर), 17 सदृश, 18 पुरग, 19 पुराग, 20 सुख, 21 धूम, 22 अजिन, 23 विनत (विनता, वनिता), 24 अवनत, 25 विकुट्यास (v.1. कुविद्यास; विकुघास), 26 पराशर, 27 अरुस्, 28 अयस्, 29 मौद्गल्य, 30 यूकर (मौद्गल्याकर). 31 रोमन्, 32 बर्बर, 33 अवयास and अयावस्
1 ऋश्य, 2 न्यग्रोध, 3 शर (शिरा), 4 निलीन, 5 निवास, 6 निवात, 7 निधान, 8 निबन्ध (v.1. निबन्धन; निबद्ध) 9 विबद्ध, 10 परिगूढ, 11 उपगूढ, 12 असनि, 13 सित, 14 मत, 15 वेश्मन्, 16 उत्तराश्मन्, 17 अश्मन्, 18 स्थूल, 19 बाहु (स्थूलबाहु), 20 खदिर, 21 शर्करा, 22 अनडुह्, 23 अरडु, 24 परिवंश, 25 वेणु, 26 वीरण, 27 खण्ड, 28 दण्ड, 29 परिवृत्त, 30 कर्दम, 31 अंशु.
1 कुमुद, 2 शर्करा, 3 न्यग्रोध, 4 इक्कट (इत्कट, उत्कट), 5 सङ्कट, 6 कङ्कट, 7 गर्त, 8 बीज, 9 परिवाप, 10 निर्यास, 11 शकट, 12 कच, 13 मधु, 14 शिरीष, 15 अश्व, 16 अश्वत्थ, 17 बल्बज, 18 यवाष, 19 कूप, 20 विकङ्कत, 21 दशग्राम. 22 कण्टक, 23 पलाश, 24 त्रिक, 25 कत.
1 काश, 2 पाश (वाश) 3 अश्वत्थ, 4 पलाश, 5 पीयूक्षा (पीयूष), 6 चरण, 7 वास, 8 नड, 9 वन, 10 कर्दम, 11 कच्छूल्, 12 कङ्कट, 13 गुहा, 14 बिस (विश and विस), 15 तृण, 16 कर्पूर, 17 बर्बर, 18 मधुर, 19 ग्रह (गुह) 20 कपित्थ, 21 जतु, 22 शीपालः 23 नर, 24 कंटक.
1 तृण, 2 नड, 3 मूल, 4 वन, 5 पर्ण, 6 वर्ण, 7 वराण, 8 बिल, 9 पुल, 10 फल, 11 अर्जुन, 12 अर्ण, 13 सुवर्ण, 14 बल, 15 चरण, 16 बुस, 17 जन, 18 लव.
1 प्रेक्षका, 2 हलका (फलका), 3 बन्धुका. 4 ध्रुवका, 5 क्षिपका 6 न्यग्रोध, 7 इक्कट (इर्कट) 8 कङ्कट (कर्कटा), 9 संकट, 10 कट, 11 कूप, 12 बुक, 13 पुक, 14 पुट, 15 मह (महा), 16 परिवाप, 17 यवाष (d.i. यवास), 18 धुवका, 19 गर्त, 20 कूपक (कूपका) 21 हिरण्य. 22 बुधका, 23 सुकटा, 24 मङ्कट, 25 मुक.
1 अश्मन्, 2 यूथ (also युष), 3 ऊष (रूष and रुष), 4 मीन, 5 नद, 6 दर्भ, 7 वृन्द, 8 गुद, 9 खण्ड, 10 नग, 11 शिखा, 12 कोट (काट), 13 पाम (पांम !), 14 कन्द, 15 कान्द, 17 गह्व,18 गुड, 19 कूण्डल, 20 पीन, 21 गह.
1 सखि, 2 अग्निदत्त, 3 वायुदत्त, 4 सखिदत्त, 5 गोपिल (गोहित and गोहिल), 6 भल्ल 7 पाल (भल्लपाल st. भल्ल, पाल), 8 चक्र (चर्क), 9 चक्रवाक, 10 छगल, 11 अशोक, 12 करवीर, 13 वासव,14 वीर, 15 पूर, 16 वज्र, 17 कुशीरक, 18 सोहर (शोहर; सोकर), 19 सरक (सकर), 20 सरस, 21 समर, 22 समल, 23 सुरस, 24 रोह, 25 तमाल, 26 कदल, 27 सप्तल, 28 चक्रपाल, 29 चक्रवाल, 30 वक्रपाल, 31 उशीर ॥
1 संकाश, 2 कम्पिल, 3 कश्मीर (कश्मर), 4 समीर, 5 सूरसेन (शूर), 6 सरक 7 सूर,8 सुपन्थिन् (rightly सुपथिन्), पन्थ (सक्थ !) च, 9 यूप (यूथ), 10 अंश, 11 अंङ्ग, 12 नासा, 13 पलित, 14 अनुनाश, 15 अश्मन्, 16 कूट, 17 मलिन, 18 दश, 19 कुम्भ, 20 शीष, 21 विरत (चिरन्त; बिरत !), 22 समल, 23 सीर, 24 पञ्जर, 25 मन्थ, 26 नल,27 रोमन, 28 लोमन्, 29 पुलिन, 30 सुपरि, 31 कटिप, 32 सकर्णक, 33 वृष्टि, 34 तीर्थ, 35 अगस्ति, 36 विकर, 37 नासिका, 38 एग, 39 चिकार, 40 विरह,
1 बल, 2 चुल (बुल), 3 नल, 4 दल, 5 वट, 6 लकुल, 7 उरल, 8 पुल, 9 मूल, 10 उल, 11 डुल, 12 वन, 13 कुल, 14 तुल, 15 कवल,
1 पक्ष, 2 तुक्ष, 3 तुष, 4 कुण्ड, 5 अण्ड, 6 कम्बलिका (कम्बलिक), 7 वलिक, 8 चित्र 9 अस्ति, 10 पथिन् पन्थ च (also पान्थायन), 11 कुम्भ, 12 सीरक (सीरज), 13 सरक, 14 सकल (सलक), 15 सरस, 16 समल, 17 अतिश्वन् (स्वन्). 18 रोमन्, 19 लोमन्, 20 हस्तिन्, 21 मकर, 22 लोमक, 23 शीर्ष, 24 निवात, 25 पाक, 26 सिंहक, 27 अंकुश, 28 सुवर्णक, 29 हंसक (हंसका), 30 हिंसक, 31 कत्स, 32 बिल, 33 खिल, 34 यमल, 35 हस्त, 36 कला, 37 सकर्णक (सकण्डक), 38 अश्मन्, 39 अस्तिबल ॥
1 कर्ण, 2 वसिष्ठ, 3 अर्क, 4 अर्कलूष (लूष), 5 द्रुपद (डुपद), 6 आनडुह्य (अन), 7 पाञ्चजन्य 8 स्फिज, 9 कुम्भी, 10 कुन्ती, 11 जित्वन् (जित्व), 12 जीवन्त (जीवन्ती), 13 कुलिश, 14 आण्डीवत (आण्डीवत्), 15 जब, 16 जैत्र, 17 आनक, 18 अलुश,19 शल, 20 स्थिरा ॥
1 सुतंगम, 2 मुनिचित (चित्त), 3 विप्रचित (चित्त), 4 महाचित्त, 5 महापुत्र, 6 स्वन, 7 श्वेत, 8 खडिक (गडिक) 9 शुक्र, 10 विग्र, 11 वीजवापिन्, 12 अर्जुन, 13 श्वन्, 14 अजिर, 15 जीव, 16 खण्डिन, 17 कर्ण, 18 विग्रह,
1 प्रगदिन्, 2 मगदिन्, 3 मददिन्, (शरदिन्), 4 कविल (कलिव), 5 खण्डित (खडिव), 6 गदित (गदिव), 7 चूडार, 8 मडार (मार्जार), 9 मन्दार, 10 कोविदार ॥
1 वराह, 2 पलाश, 3 शिरीष, 4 पिनद्ध, 5 निबद्ध, 6 बलाह, 7 स्थूल (स्थूण), 8 विदग्ध, 9 विजग्ध, 10 विभग्न, 11 निमग्न, 12 बाहु, 13 खदिर, 14 शर्करा, 15 विनद्ध, 16 विरुद्ध 17 मूल ॥
1 कुमुद, 2 गोमय, 3 रथकार, 4 दशग्राम, 5 अश्वत्थ, 6 शालमलि (ली), 7 शिरीष, 8 मुनिस्थल, (स्थूल), 9 कुण्डल, 10 कूट, 11 मधूकर्ण, 12 घासकुन्द, 13 शुचिकर्ण, 14 मुचुकर्ण, 15 कुन्द ॥,
