गर्ग-आदिभ्यो यञ्

Adhyāya 4 · Pāda 1 · Rule 105

The affix yañ comes in the sense of a gotra (Patronymic) descendant after the words garga etc.,

Thus गार्ग्यः, 'the grandson or a still lower descendant of Garga', so also वात्स्यः &c.

1 गर्ग, 2 वत्स,। 3 वाजासे। 4 संस्कृति, 5 अज, 6 व्याघ्रपात्, 7 विदभृत्, 8 प्राचीनयोग, 9 अगस्ति, 10 पुलस्ति, 11 चमस, 12 रेभ, 13 अग्निवेश, 14 शंख, 15 शट, 16 शक, 17 एक, 18 धूम, 19 अवट, 20 मनस्, 21 धनंजय, 22 वृक्ष, 23 विश्वावसु, 24 जरमाण, 25 लोहित, 26 शंसित, 27 बभ्र 28 वल्गु, 29 मण्डु. 30 गण्डु, 31 शंकु, 32 लिगु, 33 गुहलु, 34 मन्तु, 35 मंक्षु, 36 अलिगु, 37 जिगीषु, 38 मनु, 39 तन्तु, 40 मनायी, 41 सूनु, 42 कथक, 43 कन्थक, 44 ऋक्ष, 45 तृक्ष (वृक्ष) 46 तनु, 47 तरुक्ष, 48 तलुक्ष, 49 तण्ड, 50 वतण्ड, 51 कपिकत, 52 कत, 53 कष, 54 भूत, 55 कुरुकत, 56 अनडुह 57 कवि, 58 पुरुकुत्स, 59 शक्ति, 60 कण्व, 61 शकल, 62 गोकक्ष, 63 अगस्त्य, 64 कुण्डिनी 65 यज्ञवल्कं, 66 पर्णवल्क, 67 अभयजात, 68 विरोहित, 69 वृषगण, 70 रहूगण, 71 शण्डिल, 72 वर्णक (चणक) 73 चुलुक, 74 मुद्गल, 75 मुसल, 76 जमदग्नि, 77 पराशर, 78 जतूकर्ण (जातूकर्ण) 79 महित, 80 मन्त्रित, 81 अश्मरथ, 82 शर्कराक्ष, 83 पूतिमाष, 84 स्थूरा, 85 अदरक (अररक) 86 एलाक, 87 पिङ्गल, 88 कृष्ण, 89 गालन्द, 90 उलूक, 91 तितिक्ष, 92 भिषज (भिषज्) 93 भिष्णज, 94 भडित, 95 भाण्डत, 96 दल्भ, 97 चेकित, 98 चिकित्सित, 99 देवहू, 100 इन्द्रहू, 101 एकलू, 102 पिप्पल, 103 बृहदग्नि, 104 सुलोहिन्, 105 सुलाभिन्, 106 उक्थ, 107 कुटिगु, 108 संहित, 109 पथ, 110 कन्थु, 111 श्रुव, 112 कर्कटक, 113 रुक्ष, 114 प्रचूल, 115 बिलम्ब, 116 विष्णुज ॥

The word मनु is found in the लोहितादि sublist of this class. It ought to take ष्फ after यञ् in the feminine by 4.1.18, how then the form मानवी in मानवी प्रजा ? The affix यञ् comes in denoting a Gotra offspring, but in denoting a descendant in general, this affix will not come, and hence no shpha also. If so, then why the immediate descendant of जमदग्नि is called जामदग्न्यः which is a Name of Parasuram the son of Jamadagni, or why Vyasa the son of Parasara is called पाराशर्यः ? These are exceptions formed by गोत्र रुपाध्यारोपः i.e. by superimposing of Gotra-form on these. Their proper apatya forms are by ऋष्यण् 4.1.114 i. e. जामदग्नः and पाराशरः ॥,

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